Mujhe tumse aaj bhi h mohabbat by S.K.

Muhabat

❂ Mere Aansuon Ka Beeh Jana Muhabat ❂

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✰✰✰ Yeh is bat ka sabut hai mjhy tum se aj bhi Muhabat hai.
 Tumhara mere qareb Ana or mera jhunjla jana ye is bat ka sabut hy k mjhy tum se aj bhi mohabat hy.
Tumhara izhar karna mera inkar karna mera tumhe bar bar inkar karna or tumhara yun israr karna is bat ka sabut hy k mjhy tum se aj bhi muhabbat hy.
Muhabat wo nh hoti jo logo ko mil jae tum kehte ho na Han mjhy bhi tum se muhabat hai.
Han men ye keh nhi sakti darde judai seh nhi sakti.
Is liye kehne se Darti hon muhabat ka izhar karne se Darti ho men ye sab sehne se Darti hon mjhy tum se mohabat thi mjhy tum se mohabat hy.
Tumhri zaat k siwa mjhy na ab kuch matlb hai mein dunia mein kahin jaon har jaga tumhe hi pati hon.
Jab Jab mjhy ye hawa chu k jati hy ye ahsas dilati hy k tu is men sans leta mere har dam tu pass rehta hy.  ✰✰✰
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Mujhe Tum Se Behad Muhabat hai

Ye Kis Ne Keh Deya Tum Se
K Rabte Nahi Honge
To Muhabbat B Nahi Hogi
Arey
Muhabbat To Ebadat Hai
K Rabta Na Ho Phr Bhi
Muhabbat Qaim Rehti Hai
Kesi Namaaz Ki Tarah
Kesi Dua Ki Manind
Kesi Tasbeeh K Daano Par
Tera Ism Aaj B Zinda Hai
Kesi Zikr E Mussalsal Ki Tarah
Me Barmala Ye Kehta Hon
Mujhe Kal Bhi Tumse Chahat Thi
Mujhe Aaj Bhi Teri Zaroorat Hai
“Zia” Mujhe Tumse Behad Muhabbat Hai
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woh... beeta hua 1 sach jo aaj saamne aya

तीस साल
पहले उसने कहा था कि जंग में प्यार
नहीं होता लेकिन प्यार में जंग संभव है।
इसलिए तुमसे कहती हूं, अगर इस हादसे
को टालना चाहते हो तो मेरी बात मान लो।
तब मैं कैरम का कॉलेज व डिस्ट्रिक्ट
चैंपियन था, फुटबाल का भी बेहतरीन
खिलाडी था, टीम का कप्तान। हर मैच
जीत कर, हाफ पैंट और हरी-सफेद जर्सी में
उसके यहां पहुंच जाता। वह दरवाजे पर इंतजार
करती। मैं दूर से जीत का इशारा करता और
वह तालियां बजा कर मेरा स्वागत
करती थी।
ऐसे ही किसी दिन वह गेट पर खडी थी।
मैंने उसके करीब आकर कहा था-
इस दरवाजे पर मेरी आहट को रुकी तू,
कहीं गुजरे न यहीं से कहारों के कदम..
कि मेले में हाथ छूटी बच्ची की तरह फिर
हर शाम मरेगी..हर उम्मीद तोडेगी दम!
अगर ऐसा हुआ..
तो समझ लूंगा मैं-
इस व्यापारी से जग ने
इक और भरम दिया है
कि जैसे- गरीबी से घिरी किसी औरत
ने- इक और बीमार-सी बच्ची को जनम
दिया है!
वह गुमसुम मुझे देखती रही। सांप सूंघी सी!
क्या हुआ गुडिया? मैं जीत कर आया हूं।
स्वागत नहीं करोगी एक कप चाय से?
जंग में प्यार नहीं होता, मगर प्यार में जंग
संभव है। इसलिए कहती हूं, अगर इस हादसे
को टालना चाहते हो तो बात मान लो..।
मैं समझा नहीं..
तुम्हारे दोस्त तुमसे गोल मांगते हैं, लगभग हर
मैच में तुम गोल करते हो। तुम भूल जाते
हो कि मैंने भी तुमसे कुछ मांगा है।
क्या?
कहानियां और लाल चूडियां..
पर मुझे हरा पसंद है। हरी चूडियां चलेंगी?
नहीं-। यूं समझ लो कि मुझे लाल रंग प्रिय
है। अधिकार मांग रही हूं,
नहीं मिलेगा तो छीन कर लूंगी। जंग में सब
कुछ जायज है।
और सचमुच, वह मुझसे
कहानियां लिखवाने लगी। जब
भी कहानी छपती, उसे लगता, उसने एक
किले का कब्जा कर लिया। वह एक के बाद
एक जंग जीतती गई। अचानक एक दिन
वक्त के आतंकवादी ने कुछ इस तरह छल से
हमला किया कि हमारा प्यार लहूलुहान
हो गया। उसकी शादी हो गई। उस रोज मैंने
फिर एक कविता लिखी-
ये तू कि जिसने मेरी पीडा को छांव दी
अब होके अलग अश्कों में ढली जाती है..
ये तू नहीं-हर औरत की कोई लाचारी है
जो सिक्के की तरह हाथों से
चली जाती है..
ऐसी ढेरों पंक्तियां डायरी के पन्नों के
बीच फूलों की तरह दब कर सूख गई।
कहीं कोई खुशबू नहीं, हरापन नहीं। लेकिन
मुझे हरा रंग पसंद था और तबसे तो और,
जबसे बुध की महादशा शुरू हुई- ॐ बुं बुधाय
नम:।
अंतिम बार उसने कहा था, मेरी शवयात्रा में
आओगे?
शवयात्रा?
डोली उठेगी तो लोग रोएंगे, जैसे
अर्थी उठने पर रोते हैं। देखना, लाल
साडी और लाल चूडियों में
तुम्हारी गुडिया कैसी लगती है!
मैंने कहा, हमारे प्यार को सलीब दी गई है।
लहू की बूंदों से हम तर हो गए। तुम मुझे
भी प्यार का लाल रंग दिए जा रही हो। अब
बाकी की उम्र हमें इस रंग से
मुक्ति नहीं मिलेगी।
मगर एक दिन उसे मुक्ति मिल गई। उसके
माथे पर लाल रंग पोंछा गया। इन तीस
वर्षो में हम नहीं मिले। मैं पटना आ
गया और वह बेगमसराय चली गई। अपने-
अपने परिवारों में हम खो गए। मैं
साहित्यिक कार्यक्रमों के सिलसिले में
कई बार बेगमसराय गया, लेकिन उससे
नहीं मिला। मुंगेर आने से पहले हम
बेगमसराय में रहते थे। 1954 में घर-बार बेच
कर मुंगेर आए। उसने कहा, कैसा संयोग है
कि तुम बेगम सराय से मुंगेर चले आए, मैं
बेगमसराय जा रही हूं। तुम्हें
नहीं लगता कि हम खुद से भाग रहे
शरणार्थी जैसे हैं?
अधिकतर धार्मिक उन्माद में ऐसे हालात
बनते हैं, जब
आदमी को शरणार्थी बनना पडता है। हमारे
बीच धर्म की दीवार कहां रही? मैंने
कहा तो वह बोली, जो पूरे मन व
आत्मा की गहराई से धारण किया जाए,
वही धर्म है। हम प्यार को धारण कर
धार्मिक बन गए। प्यार के धर्म ने हमें 12
वर्षो तक विश्वास की तकली पर चढा कर
एहसास के धागे में बदल दिया है। पहले तुम
रुई की तरह कहीं उड रहे थे, मैं कहीं और
भटक रही थी। अब हम धागा बन चुके हैं।
अब हमें कोई अलग करके फिर से रुई में
तब्दील नहीं कर सकता। ध्यान रखना,
विश्वास की तकली पर काता गया एहसास
का धागा तुम्हारी गलती से टूट न जाए।
एहसास और सांस, दोनों के टूटने से मृत्यु
होती है..।
तुम्हारे जाने के बाद मेरा क्या होगा?
अब तुम कहीं और मैं कहीं! दोनों हम बन
चुके हैं। हम यानी विश्वास की तकली पर
12 वर्षो तक काता गया एहसास का धागा।
याद रखो, एहसास और रिश्ते में फर्क
होता है। रिश्ते में अकसर लोग समझौते
करते हैं-झुकते हैं, झेलते हैं। कभी-
कभी रिश्तों में एहसास का पौधा भी जन्म
लेता है। सांस व एहसास, दोनों के टूटने से
मौत होती है। सांस टूटने से इंसान मरता है,
एहसास टूटने से प्यार।
..यही वजह थी कि मैं बेगमसराय जाकर
भी उससे नहीं मिला। एहसास के उस धागे
को रोजरी या जनेऊ की तरह धारण कर मैं
धार्मिक बन गया। मैंने धर्म परिवर्तन
नहीं किया। लेकिन यह सुन कर कि वह
अकेली और दुखी है, मैं खुद को नहीं रोक
सका।
..कई लोगों से उसके बारे में पूछा। कोई उसे
नहीं जानता था। मन कांच की तरह चटक
गया। हे प्रभु! इस शहर में, इस कदर अनजान-
अनाम है मेरी गुडिया!
एक आदमी ने कहा, कहीं आप ग्रीन
दीदी के बारे में तो नहीं पूछ रहे हो?
मैं चौंका। ग्रीन दीदी.. ग्रीन मैडम.. ग्रीन
मेमसाहब..! यहां उन्हें उनके नाम से
तो गिने-चुने लोग ही जानते हैं।
हरी चूडियों से भरी कलाइयां, हरी साडी..,
सभी ने अपनी उम्र के हिसाब से
उनका नामकरण किया है। पर अब सफेद
सूती साडी..नंगी कलाइयां..।
मैं जाता हूं तो वह दरवाजा खोलती है.. तुम?
आओ, भीतर आओ।
मैं उसे देख कर सोचने लगा, कभी इसने
कहा था, जंग में प्यार नहीं होता, मगर प्यार
में जंग संभव है। वह भीतर जाती है और कुछ
देर में ही चाय लेकर आ जाती है।
नंगी कलाइयां, सफेद सूती साडी, सफेद रंग!
पर उसे तो लाल रंग प्रिय था!
तुम क्या सोचने लगे? चाय पियो न?
मैंने प्याली हाथ में लेकर चुस्की ली। वह
चुपचाप मुझे देखती रही। फिर धीरे से
बोली, तुम अपना खयाल नहीं रखते,
देखो तो तुम्हारे बाल कितने सफेद हो गए
हैं।
और तुमने? जिंदगी के खूबसूरत रुमाल के
कोने में तुमने एहसास का जो धागा सहेजा था,
उसे कीडों के हवाले क्यों किया?
हां, यह सच है कि इस घर में आकर मेरी देह
और इच्छाओं को वक्त की दीमक धीरे-धीरे
चाटने लगी। मगर अब तो सब खत्म
हो गया है.., वह फफक कर रोने लगी।
खुद को जब्त कर बोला, गुडिया, हम
तो समझे थे कि होगा कोई छोटा-सा जख्म,
मगर तेरे दिल में तो बडा काम रफू
का निकला.., उसके आंसू पोंछने के लिए
हाथ बढाया तो वह खडी हो गई, न, मुझे
स्पर्श न करना। कल उनकी पत्नी थी, अब
विधवा हूं। सांस टूटने से इंसान मरता है-
रिश्ता नहीं, चाहे झेला हो या समझौते पर
टिका हो।
मैंने देखा, वह आंसू पोंछ रही थी। मैं जेब में
हाथ डाल कर कुछ टटोलने लगा। दरवाजे पर
आकर कहा, अच्छा ग्रीन, चलता हूं।
वह निकट आ गई, तुम्हें मेरा नया नाम
पता चल गया! सच है कि शादी के बाद मैंने
हरी चूडियां व साडियां ही पहनीं,
ताकि जख्म हरा रहे। पति के होने और
प्रेमी के न होने के एहसास को मैंने भरपूर
जिया है..। और हां, ये रुपये तुम मेज पर भूल
आए थे।
रख लो, शायद तुम्हारे काम आ जाएं।
कुछ लोगों का उसूल है-मुहब्बत करो, खाओ-
पिओ-मौज करो। ऐसे लोग मुहब्बत
को सिक्के की तरह एक-दूसरे के
जिस्मों पर खर्च करते हैं और
आखिरी वक्त में कंगाल हो जाते हैं। कुछ
इसे बेशकीमती समझ कर खामोशी से दिल
के बैंक में रख छोडते हैं। रकम
बढती जाती है। मैंने यही किया था।
वर्षो का बही-खाता तुम्हारे भी पास होगा?
मैंने हाथ बढाया- उसने मेरी हथेली पर रुपये
रख दिए। दरवाजा फिर बंद हो गया।
मैंने देखा, घर की खपरैल छत टूटी हुई थी।
दीवारें दरक गई थीं। बावजूद इसके
वर्षो का बही-खाता खोलने पर पता चला,
दरवाजे के उस पार एक अमीर औरत
रहती है।

jeewan...1 anokha magar sach

Aaj subah ek chidiya ped par baith
sustane lagi.
"Bahut door se ud ke aayi ho kya?"
maine pucha.
" Haan zara door se aayi hun. Tum
kaun ho?? "
'Mai kaun hun??' en shabdon ne
mujhe apne swaroop ka punah
ankalan karne ke liye vivash kar
diya. Mai isi ped ka ek patta hun,
jo aaj peela ho chuka hun.
Tabhi ek patte ke girne ki awaz se
meri tandra (soch ki awastha)
tooti. " Yeh hun mai " maine us
patte ki ore ishara kiya jo dharti
se mil chuka tha.
"Yeh!!!!!" chidiya chaunkate hue
boli.
" Han....ab se kuch der baad mai
bhi aise hi gir jaunga."
"Kya sabhi ke saath aisa hota
hai??". chidiya boli.
"Han..bahut samay ho gaya, apr
lagta hai jaise kal ki hi baat hai.
Tab dharti ne kohre ki chadar utar
kar, basant ki saari pehni thi. Har
budha patta yuhi toot kar dharti
pe gir raha tha. Tab mai naya tha.
Ek kopal phuti aur maine ankh
kholi. Yeh jeevan anmol hota hai,
ek pal mai beet jata hai. Tab sabhi
mujhe khilate the, aur mai sochta
ki yeh pal tham jayein, par haath
mai kuch nahi hota ."
" Dheere dheere mai badhne
laga....Ab mera kaam auron ko
bhojan karana tha. Mai subah
sathiyon ke saath uthata, hawa se
khelta, apna kaam karta, bhojan
bana kar (photosynthesis ) ped
ko deta, raat ko thak ke so
jata.mahine beet gaye. Ab phir
dharti ne khore ki chadar utar di
hai. Mai budha ho chuka
hun....mera kaam poora ho gaya."
Chidiya ne poocha " tum wapis
nahi aaoge?? "
Mai muskurane laga " Han
aunga..jab patta koi mujhe yaad
karega to mai oos ban ke us par
bikhar jaunga. Jab koi kopal
phutegi to hawa ka sparsh ban ke
use sehlaunga. Kitne hi patte
bikhar jate hain...kitni baatein wo
kehna chahte hain par koi sun ne
wala nahi hota. Tumne meri baat
suni, shukriya. Khair ab mai chata
hun................. "
"Samajh gayi...yeh jeevan hai. Aaj
hum hai..kal koi aur aaega." Weh
boli.
Chidiya ki ankhon se do boond
ansu mujh par gir pade...mai bas
nistej sa muskura diya. Aur khud
ko is hawa ke hawale kar diya...

deep heart touching lines by s.k.ojha

Tune to kaha tha ishQ dhong hai,
Tujhe ishQ ho khuda kare,
Koi tujhko usse Zudaa kare.
Tere honth hasna bhool jayen,
Teri aankh poori namm raha kare.
Tujhe hizr lage wo ghadi,
Tu har pal milan ki dua kare.
Tu usey dekh kar ro pade,
Wo nazar jhuka ke chala kare.
Fir tujhe ishQ pe ho yaqeen,
Tu usey tasbiyon me padha kare.
Fir mai kahu "IshQ to dhong hai...!!!"
Tu nahi-nahi kaha kare.
Tu nahi-nahi kaha kare.

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Ajeeb sikashish hai aap me
Ki hum aap k khayalon me khoye rehte hai.
Ye soch kar k aap khawabo me aao ge...
Hum din me bhi soya karte hai.
Badalna aata nahi humko mousmo ki tarah,
Har ek roop main tera intezaar karte hain.
Na tum samet sakogi jise qayamat tak,
Kasam tumhari tumhe itna pyar karte hain.

Sangini- very deep lines


मोक्ष के उस द्वार पर/
धिक्कार है संसार पर/
सात फेरे जब लिए थे/
सात जन्मों के सफर तक/
एक जीवन चलो बीता/
साथ यद्यपि मध्य छूटा/
किन्तु छः है शेष अब भी/
तुम चलो आता हूँ मैं भी/
करके कुछ दायित्व पूरे/
हैं जो कुछ सपने अधूरे/
चल तुझे मैं छोड़ आऊँ/
देह हाथों में उठाकर/
टूट कर न हार कर/
धिक्कार है संसार पर/
तू मेरी है मैं तुझे ले जाऊँगा/
धन नहीं पर हाँथ न फैलाउंगा/
है सुना इस देश में सरकार भी/
योजनाएं है बहुत उपकार भी/
पर कहीं वो कागज़ों पर चल रहीं/
हम गरीबों की चिताएँ जल रहीं/
मील बारह क्या जो होता बारह सौ भी/
यूँ ही ले चलता तुझे कंधों पे ढोकर/ कोई आशा है नहीं मुझको किसी से/
लोग देखें हैं तमाशा मैं हूँ जोकर/
दुःख बहुत होता है मुझको/ लोगों के व्यवहार पर/
धिक्कार है संसार पर/
����
(उड़ीसा में दाना मांझी द्वारा अपनी पत्नी के शव को कंधे पर उठा कर 12 किमी तक पैदल चलने पर एक कवि की वेदना)
कौन दोषी है कौन नहीं
भूल के
इस पति इस प्रेमी को नमन।
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Latest Hindi Quotes and Shayries 2019

अजीब सी "पहेली" है...इन हाथों की "लकीरों" में......
सफ़र" लिखा है मगर..."रास्ता" नहीं लिखा.....

निकलूं अगर मयखाने से तो शराबी ना समझना दोस्त,
मंदिर से निकलता हर शख्स भी तो भक्त नहीं होता 

माँगी हुई ख़ुशियों से....किसका भला होता है.....
मिलता वो ही है....जो हमने बोया होता है.....

दोस्ती भी क्या गज़ब की चीज़ होती है,
मगर ये भी बहोत कम लोगों को नसीब होती है,

जो पकड़ लेते है ज़िन्दगी में दामन इसका
समझ लो के जन्नत उनके बिलकुल करीब होती है…

नज़र और नसीब का कुछ ऐसा इत्तफाक है कि

नज़र को अक्सर वही चीज़ पसन्द आती है जो नसीब मेँ नहीं होती

तेरे बाद हमने दिल का दरवाजा खोला ही नही.
वरना बहुत से चाँद आए इस घर को सजाने के लिए

याद करके आपको जीता है कोई,
साँसों मे आपको महसूस करता है कोई,
मौत तो आनी है एक दिन,
पर आपसे दूर रहकर हर पल मरता है कोई…

अनदेखे धागो से, यूँ बांध गया कोई
वो साथ भी नही,और हम आजाद भी नही 


कलम से खत लिखने का रिवाज फिर आना चाहिए ,
ये चैटिंग की दुनिया बड़ा फरेब फैला रही है...!!


रास्ता ऐसा भी दुशवार न था
बस उसको हमारी चाहत पे ऐतबार न था
वो चल न सकी हमारे साथ वरना
हमे तो जान देने से भी इनकार न था


इतना आसान नहीं है जीवन का हर किरदार निभा पाना,
इंसान को बिखरना पड़ता है रिश्तों को समेटने के लिए...


जिस नज़ाकत से लहरें पैरों को छूती है
यकीन नही होता कि इन्होने 
कभी कश्तियाँ भी डुबाई होंगी

सभी के चेहरे में वो बात नहीं होती,
थोड़े से अँधेरे से रात नहीं होती,
जिंदगी में कुछ लोग बहुत प्यारे होते हैं,
क्या करें उन्ही से हमारी 'मुलाकात' नहीं होती.

वहाँ मोहब्बत में पनाह मिले भी तो कैसे,
जहाँ मोहब्बत बे पनाह हो..!!

गलतफहमी से बढ़कर दोस्ती का दुश्मन नहीं कोई..
परिंदों को उड़ाना हो तो बस शाखा हिला दीजिए....

अनदेखे धागो से, यूँ बांध गया कोई
वो साथ भी नही,और हम आजाद भी नही |

पूछती हो ना मुझसे तुम हमेशा की,
मैं कितना प्यार करता हूँ तुम्हे,
तो गिन लो.. बरसती हुई इन बूंदों को तुम!

पागल सा बच्चा हू....पर _दिल से सच्चा हू....
थोडासा आवारा हू...पर तेरा ही दिवाना हू..

उदास छोड़ गया वो मुझको ,
खील उठता था मैं जिसके मुस्कुराने से !!
सरे राह जो उनसे नज़र मिली,
तो नक़्श दिल के उभर गए,

हम नज़र मिला कर झिझक गए,
वो नज़र झुका कर चले गए।

मेरे चेहरे की रंगत तेरे इश्क को बयां करती है
फिर क्यों ना गुरूर हो मुझे मेरी मोहब्बत पर

Mix Hindi Shayri




दर्द ही सही मेरे इश्क़ का इनाम तो आया,
खाली ही सही हाथों में जाम तो आया
मैं हूँ बेवफ़ा सबको बताया उसने,
यूँ ही सही उसके लबों पे मेरा नाम तो आया!